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An Essay On Dowry System In Hindi

दहेज एक और सामाजिक बुराई है जो भारतीय समाज को एक बीमारी की तरह प्रभावित कर रही है और इस के लिए कोई समाधान या इलाज दिखाई नहीं दे रहा है। वास्तव में, दहेज हिंसा का एक प्रकार है जो औरतों के खिलाफ किया जाता है। ये वो विशेष अपराध है जो केवल विवाहित महिलाओं के खिलाफ किया जाता है।

दहेज क्या है?

साधारण शब्दों में दहेज, लड़की की शादी अपने बेटे से कराने के बदले दुल्हन के परिवार वालों से दूल्हे के परिवार द्वारा रुपयों या कीमती वस्तुओं की माँग के रुप में समझा जा सकता है। जिसका अर्थ दूल्हे के परिवार द्वारा दूल्हे के लिये माँगा गया मुआवजा या मूल्य से है। सभी संभावनाओं में दहेज प्रथा भारतीय समाज में विशेष रुप से केवल महिलाओं को शोषण है। हमारे देश में प्रचलित लिंग असमानता का एक और आयाम दहेज है।

संक्षेप में, ये प्रथा इस उपधारणा पर आधारित है कि पुरुष सर्वश्रेष्ठ होते है और अपनी ससुराल में लड़की को अपने संरक्षण के लिये रुपयों या सम्पत्ति की निश्चित मात्रा अपने साथ अवश्य लानी चाहिये।

दहेज प्रथा हमारे सामूहिक विवेक का अहम हिस्सा बन गयी है और पूरे समाज के द्वारा स्वीकार कर ली गयी है। एक तरह से ये रिवाज समाज के लिये एक नियम बन गया है जिसका सभी के द्वारा अनुशरण होता है। स्थिति ये है कि यदि कोई दहेज नहीं लेता है तो लोग उससे सवाल करना शुरु कर देते है और उसे नीचा दिखाने की कोशिश करते है।

दूल्हे की अधिक आय या दूल्हे के परिवार का अधिक ऊँचे स्तर के कारण दहेज की अधिक माँग की जाती है। इसमें जाति भी अपनी भूमिका निभाती है। आमतौर पर, उच्च जाति, उच्च दहेज की अवधारणा है। लेकिन हाल के दिनों में, दहेज प्रणाली एक व्यापक शोषण की व्यवस्था बन गयी है और केवल दूल्हे के परिवार की आर्थिक स्थिति ही दहेज की माँग का निर्णायक कारक होती है।

दहेज की उत्पत्ति

इस सामाजिक बुराई की उत्पत्ति का पता शादी में दुल्हन को दिये जाने वाले उपहारों की रिवाज या परंपरा से लगाया जा सकता है और उपहार देने की ये स्वैच्छिक प्रणाली थी जो हमारे धार्मिक विश्वासों की मान्यता रखती थी कि लड़की के पिता का कर्त्तव्य है कि उसे लड़की की शादी में अपनी सम्पत्ति का एक भाग अपनी बेटी को देना है क्योंकि शादी के बाद उसे दूसरे घर जाना पड़ेगा और बेटा अपने पिता की बची हुई सम्पत्ति प्राप्त करेगा। इसलिये, अपनी आय या सम्पत्ति का एक भाग अपनी बेटी को उपहार के रुप में देना एक पिता का नैतिक कर्त्तव्य माना जाता था।

किन्तु प्राचीन समय में ये व्यवस्था शोषण की प्रणाली नहीं थी जहाँ दुल्हन के परिवार से दूल्हे के लिये कोई एक विशेष माँग की जाये, ये एक स्वैच्छिक व्यवस्था थी और दुल्हन का परिवार अपनी क्षमता के अनुसार उपहार बनाता था।

लेकिन बदलते वक्त के साथ उपहार बनाने की व्यवस्था दूल्हे के परिवार द्वारा की जाने वाली अनिवार्य (बाध्यकारी) माँग की शोषण की प्रणाली में परिवर्तित हो गयी। और इस व्यवस्था ने दहेज प्रथा का रुप ले लिया। एक सामाजिक बुराई के रुप में ये न केवल विवाह जैसे पवित्र बंधन का अपमान करती है बल्कि ये औरत की गरिमा को उल्लंघित और कम करती है।

दहेज-हत्या या दुल्हन को जलाना

दहेज के लिये हत्या और दुल्हन को जलाने का अमानवीय कार्य इस दहेज प्रथा से संबंधित परिणाम है। प्रत्येक साल हजारों युवा दुल्हन ससुराल वालों द्वारा उनकी हमेशा बढ़ती हुई धन और सम्पत्ति की माँग को पूरा न कर पाने के कारण जला कर या हत्या करके मार दी जाती है।

आँकड़े उत्पीड़न, अत्याचार, आत्महत्या के लिये उकसाना और युवा दुल्हनों की दहेज हत्या से संबंधित मामलों में एक खतरनाक वृद्धि प्रदर्शित करते है। केवल 2010 में, 9,000 से अधिक दहेज से संबंधित हत्याएं दर्ज की गयी जो युवा दुल्हनों द्वारा समाना की जा रही हिंसा के स्तर को दिखाती है। ये हत्याएं, वास्तव में, भावना रहित हत्याएं (क्रूर) थी जहाँ एक मासूम लड़की को केवल इसलिये मार दिया जाता है क्योंकि वो अपने पति और उसके संबंधियों की माँग के अनुसार धन या सम्पत्ति को नहीं ला सकती।

 

इस प्रकार के मामलों में सबसे ज्यादा परेशान करने वाला और दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य है कि वो महिला ही होती है जो इन पूर्वकथित अपराधों में मुख्य भूमिका निभाती है और परिवार में पुरुष या तो निष्क्रिय समर्थक या फिर सक्रिय भागीदार की भूमिका निभाते है। और विशेष रुप से पति अपनी पत्नी की रक्षा और सुरक्षा के वैवाहिक दायित्वों के लिये कोई विशेष सम्मान नहीं रखते हैं।

दहेज निषेध अधिनियम

दहेज निषेध अधिनियम 1986, दहेज की माँग करना और दहेज देना दोनों को दंडनीय अपराध बनाता है। लेकिन अधिनियम के बावजूद, दहेज प्रथा बिना रोकटोक के जारी है और वास्तव में दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।

दुल्हन के परिवार को जिस अपमान और कठिनाई का सामना करना पड़ता हैं वो बहुत असाधारण होता है। इसके परिणाम स्वरुप अनेक सामाजिक बुराईयों जैसे: कन्या भ्रूण हत्या और चयनात्मक लिंग परीक्षण के बाद गर्भपात जैसी बुराईयों को प्रोत्साहन मिलता है। इसी कारण घरों में लड़की के साथ हमेशा भेदभाव किया जाता है क्योंकि वो परिवार पर एक बोझ समझी जाती है और उनकी शादी में दहेज की व्यवस्था करनी पड़ती है इसलिये परिवार वाले उसकी शिक्षा और भोजन में रुपये खर्च करना ठीक नहीं समझते है।

दहेज निषेध अधिनियम 1986 दहेज प्रथा की बुराईयों को रोकने में विफल रहा है और ये दहेज हत्या के बढ़ते हुये संकटों के समाधान को उपलब्ध कराने में भी पीछे रह गया। इसलिये, संसद ने विचार किया कि दुल्हन को जलाने के वर्णित अपराध के मामलों से निपटने के लिये विशेष प्रावधान करने चाहिये। इसलिये, एक संशोधन के माध्यम से भारतीय दंड संहिता में एक नयी धारा, धारा 304-ब शामिल की गयी जो नये अपराध “दहेज-हत्या” का निर्माण करती है। ये प्रावधान विस्तार से उन तत्वों की व्याख्या करता है जो एक विवाहित महिला की मृत्यु के मामलो की देखरेख करता है और वहाँ प्राप्त तथ्य से वो मृत्यु दहेज हत्या मानी जाती है। प्रावधान के अनुसार, दहेज हत्या के लिये पति और पति के किसी भी सम्बन्धी को आजीवन कारावास की अधिकतम सजा दी जाती है।

यद्यपि ये प्रावधान भी है और इससे संबंधित मामलों की सूचना भी लगातार दी जा रही है लेकिन दहेज हत्या के अपराधों की दर कम नहीं हो रही है। हत्या के अलावा, असहाय विवाहित महिलाओं पर शोषण, अत्याचार और क्रूरताओं के विभिन्न रुपों को प्रदर्शित किया जाता है।

 

सामाजिक दबाव और शादी टूटने के भय के कारण ऐसे बहुत कम अपराधों की सूचना दी जाती है। इसके अलावा, पुलिस अधिकारी दहेज से सम्बंधित मामलों की एफ.आई.आर, विभिन्न स्पष्ट कारणों जैसे दूल्हे के पक्ष से रिश्वत या दबाव के कारण दर्ज नहीं करते।

लेकिन इन सभी से अलग, महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता की कमी और कम शैक्षिक के स्तर वास्तविक कारण है जिससे की महिलाएं अपने ऊपर हो रहे दहेज के लिये अत्याचार या शोषण की शिकायत दर्ज नहीं करा पाती। और इस तरह की विवाहित महिलाएं दहेज के लिये निरंतर अत्याचार और दर्द को बिना किसी उम्मीद की किरण के साथ सहने के लिये मजबूर होती हैं।

दहेज प्रथा के उन्मूलन में नयी पीढ़ी की भूमिका

दहेज प्रथा पूरे समाज में व्याप्त वास्तविक समस्या है जो समाज द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से समर्थित और प्रोत्साहित की जाती है और आने वाले समय में भी इस समस्या के सुधरने की कोई उम्मीद की किरण भी नजर नहीं आती। भौतिकतावाद लोगों के लिये मुख्य प्रेरक शक्ति है और आधुनिक जीवन शैली और आराम की खोज में; लोग अपनी पत्नी या बहूओं को जलाकर मारने की हद तक जाने को तैयार हैं।

अब उम्मीद की किरण केवल नयी पीढ़ी के लड़कों और लड़कियों में दिखायी देती है, जो शिक्षित और आधुनिक सोच रखते है। उन्हें सामने आकर इस सामाजिक बुराई के खिलाफ लड़ना चाहिये और यदि ऐसी घटना अपने खुद के परिवार में होती है तो उसका भी विरोध करना चाहिये।

इसके अलावा, युवा दुल्हनों को भी इसका विरोध करना चाहिये, यदि उससे उसके ससुराल वालों द्वारा किसी भी प्रकार के दहेज की माँग की जाती है और तभी पुलिस या उपयुक्त अधिकारियों को इसकी शिकायत दर्ज करानी चाहिये; उन्हें खुद को पीड़िता बनने से रोकना चाहिये और स्वंय का सशक्तिकरण करना चाहिये क्योंकि उन्हें सुरक्षा प्रदान करने और उनके सशक्तिकरण के लिये कानून पहले से ही उपलब्ध है।

अन्यथा, कानूनी प्रावधानों केवल किताबी बनकर रह जायेगें और उनका वास्तविकता में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।


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निरक्षरता

क्या आप दहेज प्रथा के बारे में जानते हें? क्या आप दहेज प्रथा के दुष्परिणाम से मुक्ति पाना चाहते हें? क्या आप दहेज प्रथा पर निबंध लिखना चाहते हें ? 

अगर हाँ, तो आइए जानते हें  दहेज प्रथा क्या है ?

जानिए इस आर्टिकल से दहेज प्रथा के कारण, और दहेज प्रथा को रोकने के उपाय|

इस आर्टिकल से आप बच्चों के स्कूल में दिए जाते दहेज प्रथा पर निबंध भी लिख सकते हें|

विषय सूचि

दहेज प्रथा पर निबंध in Hindi (Dahej Pratha Ek Kalank Essay in Hindi PDF)

जानिए दहेज प्रथा क्या है : What is dowry system in Hindi?

दहेज प्रथा एक सामाजिक अभिशाप है जो की समाज के आदर्शवादी होने पर सवाल्या निशाँ लगा देता है| दहेज लेने या देने को दहेज प्रथा कहा जाता है|

 

लड़की की शादी के समय लड़की के परिवार वालों के द्वारा लड़के या उसके परिवार वालों को नगद या किसी भी प्रकार की किमती चीज़ बिना मूल्य में देने को दहेज़ कहा जाता है| जिसका अर्थ लड़के की परिवार वालों के द्वारा लड़के की मूल्य भी समझा जा सकता है| दहेज प्रथा एक सामाजिक समस्या है| दहेज प्रथा गैर कानूनी होने के बावजूद भी ये हमारे समाज में खुली तौर पर राज़ करती है|

जानिए दहेज प्रथा को विस्तार से: Detailed Introduction to Dowry System:

दहेज प्रथा एक सामाजिक बीमारी है जो की आज कल समाज में काफी रफ़्तार पकडे गति कर रहा है| ये हमारे जीवन के मकसद को छोटा कर देने वाला प्रथा है| ये प्रथा पूरी तरह इस सोच पर आधारित है, की समाज के सर्व श्रेष्ठ व्यक्ति पुरुष ही हें और नारी की हमारे समाज में कोई महत्व भी नहीं है|

इस तरह की नीच सोच और समझ ही हमारे देश की भविष्य पर बड़ी रुकावट साधे बैठे हें|

दहेज प्रथा को भी हमारे समाज में लगभग हर श्रेणी की स्वीकृति मिल गयी है जो की आगे चल के एक बड़ी समस्या का रूप भी ले सकती है |

महात्मा गाँधी ने दहेज प्रथा के बारे में कहा था की

जो भी व्यक्ति दहेज को शादी की जरुरी सर्त बना देता है , वह अपने शिक्षा और अपने देश की बदनाम करता है, और साथ ही पूरी महिला जात का भी अपमान करता है | 

ये बात महात्मा गाँधी ने देश की आजादी से पहले कही थी| लेकिन आजादी के इतने साल बाद भी दहेज प्रथा को निभायी जाती है| हमारे सभ्य समाज के गाल पर इससे बड़ा तमाचा और क्या हो सकता है?

हम सभी ऊँचे विचारों और आदर्श समाज की बातें करते हें, रोज़ दहेज जैसी अपराध के खिलाफ चर्चे करते हें, लेकिन असल जिंदगी में दहेज प्रथा जैसी जघन्य अपराध को अपने आस पास देख के भी हम लोग अनदेखा कर देते हें| ये बड़ी ही शर्म की बात है|

दहेज प्रथा को निभाने वालों से ज्यादा दोषी इस प्रथा को आगे बढ़ते हुए देख समाज में कोई ठोस कदम नहीं उठाने वाले है|

 दहेज प्रथा एक गंभीर समस्या : Dowry System- A Serious Concern:

दहेज प्रथा सदियों से चलती आई एक विधि है जो की बदलते वक़्त के साथ और भी गहरा होने लगा है| ये प्रथा पहले के जमाने में केवल राजा महाराजाओं के वंशों तक ही सिमित था| लेकिन जैसे जैसे वक़्त गुजरता गया, इसकी जड़ें धीरे धीरे समाज के हर वर्ग में फैलने लगा| आज के दिन हमारे देश के प्रयात: परिवार में दहेज प्रथा की विधि को निभाया जाता है|

दहेज प्रथा लालच का नया उग्र-रूप है जो की एक दुल्हन की जिंदगी की वैवाहिक, सामाजिक, निजी, शारीरिक, और मानसिक क्षेत्रों पर बुरा प्रभाव डालता है, जो की कभी कभी बड़े ही भयंकर परिणाम लाता है|

दहेज प्रथा का बुरा परिणाम के बारे में सोच कर हर किसी का रूह काँपने लगता है, क्यूंकि इतिहास ने दहेज प्रथा से तड़पती दुल्हनों की एक बड़ी लिस्ट बना रखी है| ये प्रथा एक लड़की की सारी सपनो और अरमानो को चूर चूर कर देता है जो की बड़ी ही दर्दनाक परिणाम लाता है |

लगभग देश की हर कोने में ये प्रथा को आज भी बड़े ही बेजिजक निभाया जाता है|

ये प्रथा केवल अमीरों तक ही सिमित नहीं है, बल्कि ये अब मध्य बर्गियों और गरीबों का भी सरदर्द बन बैठा है|

सोचने की बात है की देश में बढती तरक्की दहेज प्रथा को निगलने में कहाँ चूक जाती है? ऊँच शिक्षा और सामाजिक कार्यकर्मों के बावजूद दहेज प्रथा अपना नंगा नाच आज भी पूरी देश में कर रही है| ये प्रथा हर भारतीयों के लिए सच में एक गंभीर चर्चा बन गयी है जो की हमारे बहु बेटियों पर एक बड़ी ही मुसीबत बन गयी है|

दहेज प्रथा के कारण: Causes of Dowry System in Hindi:

दहेज प्रथा समाज की बीमारी है | इस बीमारी ने न जाने कितने ही परिवारों की खुशियों को मिटा दिया है| आज समाज में दहेज प्रथा पूरी तरह अपनी जगह बना चुकी है जो की एक दस्तक है आगे चलते समय के लिए|

दहेज प्रथा को बढ़ावा देने में समाज की ही अहम् भूमिका है | वह समाज ही है जो की दहेज प्रथा की जड़ को मजबूत कर रही है|

दहेज प्रथा की कई कारण हें, जैसे की–

  1.    इ-शादी की विज्ञापन से फैलती दहेज प्रथा-

आज के इन्टरनेट युग में शादी के लिए लड़का-लड़की इन्टरनेट के माध्यम से भी खोजे जाते हें| इस प्रकार की विज्ञापनों में लड़की की परिवार वाले कई बार अच्छे लड़के की आश में अपना स्टेटस और कमाई को ज्यादा बताने की भूल कर बैठते हें, जो की लड़के वालों में कभी कभी लोभ आ जाता है| इस प्रकार की लोभ शादी के बाद मांग में बदल जाते हें, जो की धीरे धीरे दहेज प्रथा को पनपने देता हें| और दहेज की मांग होने लगती है|

2.    समाज में पुरुष प्रधान की लहर से फैलती देहेज प्रथा-

हमारे समाज पुरुष प्रधान है| बचपन से ही लड़कियों की मन में ये बात बिठा दिया जाता है की लडके ही घर के अन्दर और बाहर प्रधान हें, और लड़कियों को उनकी आदर और इज्ज़त करनी चाहिए| इस प्रकार की अंधविश्वास और दक्क्यानूसी सोच  लड़कियों की लड़कों के अत्याचार के खिलाफ अवाज़ उठाने की साहस की गला घूंट देते हें| और इससे बढती है लड़कियों पर अत्याचार और रूप लेता है विभिन्न मांगों की, जो की दहेज प्रथा का रास्ता खोल देता है|

3.     समाज में अपनी झूठी स्टेटस से फैलती दहेज प्रथा-

जी हाँ, चौंकाने वाला पर सच| ऊँचे समाज में आज कल अपना सोशल स्टेटस की काफी कम्पटीशन चल रही है| बेटी की शादी में ज्यादा से ज्यादा खर्च करना, महँगी तोहफे देना, लड़के वालों को मांग से ज्यादा तोहफे देना, आदि लड़के वालों के मन को कई बार छू जाता है| ये आदतें धीरे धीरे लड़की पर दबाव बना देती है| शादी के बाद भी लड़के वालों की इस तरह के तोहफों की लत लग जाती है, जो की धीरे धीरे मांग की रफ़्तार को और आगे ले जाती है| और इसी झूठी शान के चलते हम जाने अनजाने में दहेज प्रथा को पनपने देते हैं|

4 .    लड़की की सुन्दरता या कोई कमी कई बार दहेज की रस्म को निभा जाती है-

कई बार दहेज प्रथा खुद लड़की की माँ बाप की गलती से भी पनपता है| अगर लड़की की सुन्दरता में कोई कमी है या फिर लड़की की किसी भी कमी के कारण शादी में दिक्कत आती है, तो माँ- बाप लड़की की शादी को तुरंत करवाने की आड़ में दहेज देना आरम्भ कर देते हें| और ये बात दहेज प्रथा को हवा देती है|

दहेज प्रथा के कारण तो अनगिनत हैं, लेकिन अब वक़्त आ गया है की हमे कारणों की नहीं, दहेज प्रथा के समाधान के बारे में सोचें|

दहेज प्रथा के दुष्परिणाम in Hindi: Effects of Dowry System in Hindi

दहेज प्रथा के परिणाम बहोत ही भयंकर हैं| दहेज प्रथा के कारण गरीब माँ बाप अपनी बेटी की भविष्य को अनसुलझा ही पाते हें|

लड़कियों की शादी के वक़्त दहेज प्रथा अपने सबसे खतरनाक रूप लेती है| शादी या उसके बाद भी जिस घर में दहेज की बू आई, उस घर में दहेज प्रथा के दुष्परिणाम दिखाई देती है| दहेज प्रथा के दुष्परिणाम से हम सब वाकिफ हैं, लेकिन इस कलंक को हम ही बढ़ावा देते हैं|

दहेज प्रथा के बुरे असर हें

  1. दहेज प्रथा के कारण होती लड़कियों के साथ अन्याय:

कई बार दहेज दुल्हन के परिवार पर बहोत ही बुरा प्रभाव डालती है | दहेज के खर्चे पूरा सन्न कर जाति है| लड़की के शादी का माहोल खुशियों भरा नहीं रहता, अपमान और शर्मसार का माहोल बन के रह जाती है| इसी कारण हमारे समाज में लडकीयों को कई बार एक बोझ माना जाता है |

      2. दहेज प्रथा के कारण लड़कियों पर अत्याचार :

शादी के बाद जैसे ही दिन गुजरने लगते हें, वैसे ही दहेज की मांगे बढ़ने लग जाती है| अगर लड़की दहेज लाने के खिलाफ बोलती है तो उस पर शारीरिक, मानसिक अत्याचार किया जाता है | घरोई हिंसा को हवा दिया जाता है | लडकी पर कई तरह के जुर्म किया जाता है ताकि वह अपने माईके से दहेज की बात कर सके|

      3. देहेज प्रथा से बढती लड़का लड़की में अंतर:

दहेज प्रथा के कारण कई घरों मे लड़कियों को उतना मोह और प्यार नहीं मिलता जितना की घर के लड़कों को दिया जाता है| माँ बाप को लड़कियों को आने वाली वक़्त में खर्चा का साधन लगता है, और इसी कारण वह कन्या संतान को कई बार अपने हाल में छोड़ते हें|  इसी तरह लड़का और लड़की में अंतर बनता है | लड़का और लड़की एक समान पर निबंध पढ़ें|

दहेज़ प्रथा रोकने के उपाय in Hindi:How to Stop Dowry Practice:

दहेज प्रथा हमारे समाज को खोंखला और बेमतलब बना रही है| ये प्रथा हमारे ही जिंदगी को तबाह कर रही है| लेकिन अब वक़्त आ गया है की हमे दहेज प्रथा के खिलाफ एक जूट हो कर अपना आवाज़ बुलंद करना है|

हर समस्या का समाधान उसके अन्दर ही है| इस तरह से दहेज प्रथा का समाधान भी इसी प्रथा में ही है, बस दहेज लेने और देने की आदत को “हाँ” से “ना” में बदलना है|

आइए जानते हें की दहेज प्रथा को कैसे रोकें

दहेज प्रथा को रोकने के लिए हम ही सबसे बड़ा और कामयाब कदम उठा सकते हें |

दहेज प्रथा को पूरी तरह मिटाने के लिए हमे बस दो ही बातों को अपनाना है-

  1.  अगर आप एक लड़की हें- तो आप कभी भी ऐसी घर में शादी करने के लिए अपना स्वीकृति न दें जो दहेज की मांग कर रही हें|
  2. अगर आप एक लड़का हें- तो आप दहेज को अपने शादी या वैवाहिक जिंदगी का हिस्सा न बनने दें|

बस हममे ही है समस्या|

हम दहेज प्रथा को पूरी तरह नाकामयाब बना सकते हें अगर हम अपने आप को पूरी तरह इसके लिए जिम्मेदार मानें |

दहेज प्रथा हमारे समाज का एक पुराने जमाने की हिस्सा है| हम ऐसे ही इस प्रथा को झट से बंद नहीं कर सकते| इसके लिए हमे कदम कदम कर के चलना होगा| हमे अपने समाज और देश में कई प्रकार के बदलाव लाना होगा, जैसे की-

  • दहेज प्रथा को रोकने के लिए क़ानून व्यवस्था में बदलाव लाना होगा-

आज कल हमारे समाज में दहेज प्रथा खुली तरह से निभाया जाता है जब कि ये कानूनन जुर्म है| दहेज की व्यापार को बिना किसी दर से किया जाता है| ये ऐसा है क्यूंकि हमारे देश की कानूनी व्यवस्था जरुरत के मुताबिक़ मजबूत नहीं है| जरुरत है दहेज के खिलाफ क़ानून में बदलाव लाना|

  • लड़का-लड़की एक सामान के बारे में लोगों को अवगत करना होगा –

सबसे पहले हमे अपने सोच में बदलाव की जरुरत है| हमे लड़कियों को लड़कों के बराबर समझना है| लड़कियों को लड़कों से किसी भी तरह छोटा महसूस नहीं होने देना है| अगर ऐसा हुआ तो लड़कियों को ससुराल जाने के लिए दहेज का साथ की जरुरत नहीं होगी| कहते हैं की कोई भी कार्य की शुरुवात पहले अपने आस पास की माहोल से करनी चाहिए| घर में अपने बच्चो को लडकियों को सम्मान और आदर करने के बारे में बताना होगा| हमे लड़का लड़की एक समान (पढ़िए लड़का लड़की एक समान पर निबन्ध) को अपनाना होगा|

  • कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना होगा –

हमे कन्या भ्रूण हत्या(पढ़िए कन्या भ्रूण हत्या पर निबंध) को पूरी तरह से बंद करने की सपथ लेना होगा| | जितनी लड़कियों की हत्या होगी, दहेज प्रथा को उतना हाथ मिलेगा| दहेज प्रथा लड़कियों की कमी के कारण भी हमारे समाज में पनपती है | ज्यादा से ज्यादा कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जागृति बना के हम दहेज प्रथा पर रोक लगा सकते हें|

  • दहेज प्रथा को रोकने के लिए महिला सशक्तिकरण पर जोर देना होगा –

इसकी चाबी है एजुकेशन | हमे लड़कियों को ज्यादा से ज्यादा पढ़ाना होगा| उन्हें आजादी देनी होगी, आजादी अपने आप को एक मजबूत नारी बनाने की | हमे लड़कियों के पढाई पे ज्यादा से ज्यादा ध्यान और महत्व देना होगा | लड़कियों को पढ़ा लिखा के अपने पैरों पे खड़े होने के काबिल बनाना होगा, जो की वक़्त आने पर दहेज के खिलाफ खुद लढ सकती हें |

  • देहेज्प्रथा के खिलाफ सामाजिक जागरूकता फैलाना होगा –

हमे दहेज के खिलाफ समाज में जागरूकता पैदा करना है| गाँव और सहारों में दहेज के बुरे प्रकोप के बारे में बताना होगा जो की कई इंसानों को दहेज की पाप करने से रोकने में सहायक साबित होगी| खुद दहेज के खिलाफ सख्ती से पेश आना होगा|

  • हमे सही और गलत तय करना होगा –

जी हाँ!

हमे कुछ बातें अपनी जिंदगी में तय करना होगा| तय करना होगा की हम किसी भी ऐसी शादी में न शामिल हों जहां दहेज की प्रथा को निभायी गयी है|

लड़कियों को ये तय करना होगा की उन्हें दहेज मांगे जाने वाली घरों को अलविदा कहना है, बिना इस बात कि झूठी सपने देख कर की वक़्त सब कुछ ठीक कर देगा|

दहेज प्रथा पर अन्तिम चर्चा: conclusion on dowry system

दहेज प्रथा हमारे समाज को हमारा नहीं छोड़ा | ये प्रथा पुरे समाज को अपने वस में कर खोखला बना चुका है | वक़्त आ गया है इसके खिलाफ आवाज़ उठाने की| वक़्त आ गया है दहेज प्रथा के क़ानून कि सख्ति से इस्तेमीलकरने की| देहेज प्रथा के कारण आज भी हमारा समाज पिछडा हुआ है| लड़का और लड़की में अंतर मानते हें|

तो चलिए एक मुहीम छेड़ें देहेज प्रथा के खिलाफ| अगर आप के मन में दहेज प्रथा के बारे में कोई जानकारी है तो प्लीज निचे हमे लिख के जरुर भेजें ताकि आप कि कही हुई शायद कोई छोटी सी बात कई जिंदगियों को तबाह होने से बचा दे| दहेज की आदत को हमे जड़ से उखाड़ फेंकना है और एक स्वच्छ भारत की गठन करना है|

हमे अपने सुझाव जरुर दें | और दहेज प्रथा को “ना” बोले|

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